नोएडा: साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 3 आरोपी गिरफ्तार; 29 पासबुक, 23 चेकबुक और 22 सिम कार्ड बरामद

Oct 11, 2026 - 17:22
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नोएडा: साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 3 आरोपी गिरफ्तार; 29 पासबुक, 23 चेकबुक और 22 सिम कार्ड बरामद

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संपूर्ण सिटी न्यूज़ | 11 अक्टूबर 2026

ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट की थाना बिसरख पुलिस ने साइबर ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाकर उन्हें साइबर ठगी करने वाले अन्य लोगों को उपलब्ध कराते थे। इन बैंक खातों के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों में निवेश, ब्लैकमेलिंग और सोशल मीडिया विज्ञापन के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से विभिन्न बैंकों की 29 पासबुक, 23 चेकबुक, दो डेबिट कार्ड, 14 आधार कार्ड, आठ पैन कार्ड, VI कंपनी के छह सिम कार्ड, जियो के दो सिम कार्ड और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

### गौर सिटी-2 के पास से हुई गिरफ्तारी

पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, साइबर ठगी की घटनाओं का खुलासा करने के लिए अधिकारियों के निर्देशन में एक टीम गठित की गई थी। इसी दौरान पुलिस टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि साइबर ठगी से जुड़े कुछ आरोपी पैसों के लेन-देन के सिलसिले में गौर सिटी-2 स्थित भविष्य इंडिया टावर के पास आने वाले हैं।

सूचना के आधार पर थाना बिसरख पुलिस की टीम ने कार्रवाई करते हुए 10 अक्टूबर 2026 को शाम करीब 4 बजे तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रेम, कुनाल और आतिश के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपी उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सासनी क्षेत्र के निवासी हैं। गिरफ्तार आरोपियों में प्रेम की उम्र 21 वर्ष, कुनाल की 19 वर्ष और आतिश की 20 वर्ष बताई गई है।

### फर्जी दस्तावेजों से खुलवाते थे बैंक खाते

पुलिस की जांच में सामने आए कथित तरीके के अनुसार, आरोपी अपने और अन्य लोगों के आधार कार्ड तथा पैन कार्ड में पते से संबंधित हेरफेर कर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद इन खातों को कथित मुख्य आरोपियों अरुण और नाजेश की टीम को उपलब्ध कराया जाता था।

पुलिस के मुताबिक, इन खातों का इस्तेमाल देश के अलग-अलग राज्यों में लोगों के साथ निवेश के नाम पर धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग और सोशल मीडिया पर विज्ञापन से जुड़े फ्रॉड की रकम प्राप्त करने के लिए किया जाता था। ठगी से प्राप्त धनराशि विभिन्न बैंक खातों में जमा कराई जाती थी और फिर चेक तथा ऑनलाइन माध्यमों से निकाल ली जाती थी।

### कमीशन लेकर उपलब्ध कराते थे बैंक खाते

प्रेस विज्ञप्ति में पुलिस ने बताया कि कथित तौर पर प्रेम, कुनाल और आतिश को उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों के बदले 20 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था। बाकी रकम अरुण, नाजेश और उनके अन्य साथियों के बीच बांटे जाने की बात सामने आई है।

पुलिस के अनुसार, जब शिकायतों के कारण बैंक खाते फ्रीज हो जाते थे, तो आरोपी नए बैंक खाते खुलवा लेते थे। इसके अलावा, बैंक खातों में पंजीकृत मोबाइल नंबरों को नष्ट कर देने का भी उल्लेख प्रेस विज्ञप्ति में किया गया है। पुलिस का कहना है कि इस तरीके से गिरोह द्वारा करोड़ों रुपये की साइबर ठगी की गई।

### ये सामान हुआ बरामद

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से निम्नलिखित सामान बरामद किया है:

* विभिन्न बैंकों की 29 पासबुक

* विभिन्न बैंकों की 23 चेकबुक

* दो डेबिट कार्ड

* 14 आधार कार्ड

* आठ पैन कार्ड

* VI कंपनी के छह सिम कार्ड

* जियो कंपनी के दो सिम कार्ड

* तीन मोबाइल फोन

बरामद दस्तावेजों और बैंकिंग सामग्री की जांच के आधार पर पुलिस मामले की आगे की विवेचना कर रही है।

### किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?

पुलिस ने गिरफ्तारी और बरामदगी के आधार पर थाना बिसरख में मुकदमा अपराध संख्या 743/2026 दर्ज किया है। प्रेस विज्ञप्ति में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2), 238(C), 61(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C और 66D का उल्लेख किया गया है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों को नियमानुसार न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा। प्रेस विज्ञप्ति में कथित मुख्य आरोपियों अरुण और नाजेश का भी उल्लेख है, हालांकि इस विज्ञप्ति में उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है।

### पुलिस टीम की भूमिका

इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में थाना बिसरख के उपनिरीक्षक निशांत मलिक, उपनिरीक्षक अनिल कुमार, हेड कांस्टेबल विकास तोमर, कांस्टेबल सत्येंद्र कुमार और रिजर्व कांस्टेबल आकाश कुमार शामिल रहे।

साइबर ठगी से बचने के लिए जरूरी सावधानी: किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, पासबुक, चेकबुक, एटीएम/डेबिट कार्ड, सिम कार्ड या बैंकिंग संबंधी दस्तावेज इस्तेमाल करने के लिए न दें। निवेश के नाम पर मिलने वाले संदिग्ध प्रस्तावों की जांच करें और किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में रकम प्राप्त कर आगे ट्रांसफर न करें।

 

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