एफसीआरए संशोधन विधेयक-2026 पर अमेरिका की आपत्ति, भारत ने दिया कड़ा जवाब
नई दिल्ली। विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक-2026 को लेकर भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिका की ओर से विधेयक पर चिंता और आपत्ति जताए जाने के बाद भारत सरकार ने इसे देश का आंतरिक मामला बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
अमेरिका ने अपने बयान में कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और नागरिक समाज के स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिए अनुकूल वातावरण आवश्यक है। अमेरिकी पक्ष ने उम्मीद जताई कि भारत इस दिशा में ऐसे कदम उठाएगा, जो नागरिक समाज की गतिविधियों को प्रभावित न करें।
अमेरिका की टिप्पणी के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में जवाब देते हुए कहा कि एफसीआरए से जुड़े सभी कानून और संशोधन पूरी तरह भारत की संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और कानूनी व्यवस्था के अनुरूप हैं। मंत्रालय ने कहा कि किसी भी विदेशी सरकार को भारत के आंतरिक विधायी मामलों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों का उद्देश्य पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां कानून संसद की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत बनाए जाते हैं।
एफसीआरए कानून के तहत भारत में विदेशी स्रोतों से धन प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों, ट्रस्टों और अन्य संस्थाओं के पंजीकरण, धन के उपयोग और निगरानी से संबंधित प्रावधान लागू होते हैं। सरकार का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है, जबकि कुछ संगठनों का मानना है कि इससे गैर-सरकारी संस्थाओं के संचालन पर अतिरिक्त प्रतिबंध लग सकते हैं।
इस मुद्दे पर दोनों देशों के अलग-अलग रुख सामने आने के बाद आने वाले दिनों में इस पर कूटनीतिक स्तर पर और चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
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